Lean manufacturing : जानिए इसके परिभाषा, प्रकार, उद्देश्य, लाभ, उपयोग क्या क्या है?

लीन मैन्युफैक्चरिंग को लीन प्रोडक्शन के नाम से भी जाना जाता है। लीन मैन्युफैक्चरिंग टूल का एक वांछित सेट एवं पद्धति है
जो उत्पादन प्रक्रिया में लगातार अपशिष्टों को हटाती है। लीन मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया में उत्पादन लागत कम, अधिक आउटपुट और प्रोडक्शन लीड टाइम कम होता है ।

Types of Waste- Waste के प्रकार क्या-क्या है?

1. Waiting Waste
2. Defects and Rejects Waste
3. Inventory Waste
4. Overproduction Waste
5. Over-Processing Waste
6. Motion Waste
7. Transportation Waste

1.प्रतीक्षा करना (Waiting Waste) 

फैक्टरी फ्लोर पर बोटलनेक्स या अपर्याप्त उत्पादन प्रवाह के कारण कर्मचारियों और मशीनों को प्रतीक्षा करनी पड़ती है। यह एक व्यर्थ समय होता है। प्रोसेसिंग यूनिट के बीच के स्मॉल डिले को भी इसके अन्तर्गत शामिल किया जाता है ।
इसके परिणामस्वरूप प्रभावपूर्ण लागत उत्पन्न हो जाती है, जिससे कर्मचारियों की लागत में वृद्धि की जाती है तथा प्रति यूनिट की दर से आउटपुट की मूल्य में गिरावट आ जाती है ।

2.अधिक उत्पादन (Overproduction Waste) 

इसमें मांग से ज्यादा अनावश्यक उत्पाद का निर्माण करना या आवश्यकता से बहुत पहले उत्पाद का निर्माण आदि प्रक्रियाएं शामिल की जाती हैं । यह अप्रचलन (obsolescence ) की रिस्क को बढ़ाता है ।
यह गलत वस्तु के निर्माण एवं इन वस्तुओं को डिस्काउन्ट पर बेचने की रिस्क को भी बढ़ाता है। ऐसे बहुत कम मौके होते हैं जिन पर अधिक उत्पादित उत्पाद को मार्केट में मेन्टेन किया जाता है ।

3.परिवहन (Transportation Waste) 

परिवहन के अन्तर्गत पदार्थों की ऐसी गतियों को शामिल किया जाता है जो उत्पाद में किसी वैल्यू को नहीं जोड़ती हैं, जैसे एक वर्कस्टेशन से दूसरे वर्कस्टेशनों के बीच पदार्थों को मूव करना । परिवहन अपशिष्ट को कम करने के लिए प्रोडक्शन स्टेज में सही समय पर पदार्थों को अगली प्रक्रिया के लिए मूव करना चाहिए । प्रोसेसिंग स्टेजों के बीच का परिवहन प्रोडक्शन साइकिल टाइम को बढ़ाता है। अपर्याप्त कर्मचारी और स्पेस भी उत्पादन रोकने के छोटे स्रोत होते हैं।

4.इनवेंटरी (Inventory Waste ) 

इनवेंटरी वेस्ट के अन्तर्गत उच्च स्तर के अनावश्यक कच्चे पदार्थ वर्क इन प्रोसेस और फिनिश्ड 9 प्रोडक्ट को शामिल किया जाता है। ज्यादा इनवेंटरी कम्पनी के 9 उत्पादों की लागत स्टोरेज लागत एवं डिफैक्ट रेट को बढ़ाती है।

5.दोष (De (Defects and Rejects Waste ) 

बिके हुए उत्पाद के सापेक्ष में भौतिक दोषों को प्रत्यक्ष रूप से जोड़ा जाता है। इसके अन्तर्गत पेपर वर्क उत्पाद की गलत जानकारियाँ, गलत स्पेसीफिकेशन पर उत्पादन करना, कच्चे पदार्थों का अधिक उपयोग एवं अनावश्यक स्क्रैप का उत्पन्न होना आदि को शामिल किया जाता है ।

6.ओवर – प्रोसेसिंग (Over-Processing Waste ) 

यह वह विधि है जिसमें ग्राहक के द्वारा अनावश्यक कार्य को करने में अधिक प्रोसेसिंग कार्य किया जाता है, जैसे पॉलिशिंग करना तथा उत्पाद के अन्दर परिष्करण (finishing) करना जो ग्राहक द्वारा दिखायी नहीं देता है।

7.मोशन ( Motion Waste) 

इसके अन्तर्गत अनावश्यक भौतिक प्रवाह तथा कर्मचारियों द्वारा भ्रमण करके निरीक्षण करना आदि को शामिल किया जाता है। इनके कारण कर्मचारी वास्तविक प्रोसेसिंग वर्क को ठीक प्रकार से सम्पन्न नहीं करते हैं। उदाहरण के लिए किसी भी टूल को ढूंढने के लिए पूरी फैक्टरी का चक्कर लगाना, अनावश्यक या मुश्किल भौतिक मूवमेंट जो कर्मचारियों के कार्य करने की क्षमता को कम करती हैं ।

Objectives of lean manufacturing लीन मैन्युफैक्चरिंग के उद्देश्य क्या क्या है?

1.डिफैक्ट और वेस्टेज (Defects and Wastage) 

डिफैक्ट को कम करना चाहिए तथा अनावश्यक भौतिक अपशिष्ट, जैसे कच्चे संसाधनों का अधिक उपयोग, निवारणीय दोष, डिफैक्टिव आइटमों की प्रक्रियाओं से सम्बन्धित लागत एवं अनावश्यक उत्पाद विशेषताएँ जो ग्राहक द्वारा आवश्यक नहीं होती हैं को कम करना चाहिए या हटा देना चाहिए ।

2.साइकिल टाइम (Cycle Time) 

मैन्युफैक्चरिंग लीड टाइम एवं प्रोडक्शन साइकिल टाइम को प्रक्रियाओं के बीच के वेटिंग समय को कम करके साइकिल टाइम को कम किया जा सकता है। इसके लिए सर्वप्रथम प्रक्रिया निर्माण समय एवं उत्पाद के रूप को बदलने में लगे समय को कम करना चाहिए ।

3.इनवेंटरी लेवल्स ( Inventory Levels) 

उत्पाद और साधारण वर्क – इन प्रोसेस के उत्पादन स्तर की सभी स्टेजों से इनवेंटरी – लेवल्स को कम करना चाहिए । कम इनवेंटरी का अर्थ कार्य के लिए कम पूँजी की आवश्यकता से होता है।

4.श्रम की उत्पादकता (Labour Productivity) 

कर्मचारियों के व्यर्थ समय और उनके द्वारा कार्य न किये जाने वाले समय को सुनिश्चित और कम करके श्रम की उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है ।
 

5.उपकरण और जगह का उपयोग 

प्रक्रियाओं से बोटलनेक्स को हटाने तथा मौजूदा उपकरण की उत्पादन दर बढ़ाने से उपकरण और जगह का उपयोग अधिक किया जा सकता है ।

6.फ्लेक्सिबिलिटी (Flexibility) 

लीन मैन्युफैक्चरिंग में अधिक लचीले उत्पाद निर्माण करने की क्षमता होती है। यह कम लागत और कम समय में उत्पाद का निर्माण करती है ।

7.आउटपुट (Output) 

उत्पादन चक्र समय को कम करके, श्रम की उत्पादकता को बढ़ाकर तथा उत्पादन प्रक्रियाओं से बोटलनेक्स को हटाकर मशीनों के डाउन टाइम को प्राप्त किया जा सकता है । ऐसा करने से कम्पनियाँ अपने आउटपुट को बढ़ा सकती हैं।

Lean manufacturing tools 

1. 58′
2. KAIZEN
3. POKA-YOKE
4. SMED
5. STANDARD WORK
6. VALUE STREAM MAPPING
7. GEMBA
8. HIJUNKA
9. KAN BAN
10. CONTINEUOUS FLOW
11. ANDON
12. BOTTLENECK ANALYSIS
13. HOSHIN KANRI
14. JIDOKA
15. JUST IN TIME
16. KPIs
17. OEE
18. MUDA
19. PDCA
20. ROOT CAUSE ANALYSIS
21. TAKT TIME
22. TPM
23. POINT OF USE STORAGE
24. LEVEL MIX LOADING
25. OEE
26. SMART GOALS
27. VISUAL FACTORY

लीन मैन्युफैक्चरिंग के लाभ –

1. इसके द्वारा बेहतर गुणवत्ता के उत्पाद कम लागत में प्राप्त होते हैं ।
2. इस प्रक्रिया के लिए कम लोगों की आवश्यकता होती है।
3. इसमें कम अपशिष्ट निकलते हैं तथा यह मानव एवं पदार्थ को ऑप्टिमाइज करता है।
4. इसकी बेहतर ग्राहक डिलिवरी परफॉर्मेन्स होती है ।
5. विभिन्न प्रकार के उत्पादों का निर्माण लागत में बिना बदलाव के किया जा सकता है।

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