जलवायु को नियंत्रित करने वाले कारक के कौन-कौन से हैं?

दोस्तों जब आप अपने से बड़े बुजुर्गों के पास बैठे हुए रहते हैं या टीवी रेडियो न्यूज़पेपर इत्यादि में देखा पड़ा जरूर सुना होगा कि इस साल मानसून कब आने वाला है या इस साल मानसून ज्यादा आने वाला है।

इस तरह की बातें अक्सर हमें सुनने को मिल ही जाता है जो हमारे बरसात के समय में कम बारिश होना ज्यादा बारिश होना है। इन सभी चीजों पर प्रभाव डालती है वह चीज है जलवायु जिसे हम लोग मानसून भी कहते हैं।

दोस्तों यदि आप मानसून को नहीं जानते होंगे और मानसून किस कारण से बदलते हैं जिससे बारिश होती है। तो आज हम लोग इसी

के बारे में इस आर्टिकल में जानेंगे कि मानसून बदलने के किन किन कारणों होते हैं तो चले दोस्तों ज्यादा समय ना व्यर्थ करते हुए हैं जानते हैं।

जलवायु को नियंत्रित करने वाले कारक

पृथ्वी का धरातल काफी विशाल है। इस गोलाकार धरती पर कहीं महाद्वीप है तो कहीं महासागर महाद्वीपों का धरातल भी एक जैसा नहीं है कहीं ऊंचा पहाड़ है तो कहीं नीचे मैदान।

कहीं जंगल की अधिकता है तो कहीं मरुस्थल महासागर भी आसमान रूप से फैले हैं। उत्तरी गोलार्ध में 39% और दक्षिणी गोलार्ध में 81% जल भाग है। यही सभी अंतर कहीं न कहीं वायुमंडल के गर्म व ठंडा होने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।

वायुमंडल का समान रूप से ठंडा या गर्म होना जलवायु को नियंत्रित करता है। चलिए दोस्तों मैं आपको जलवायु के प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक को बताता हूं जो कि इस प्रकार है-

1.अक्षांशीय स्थिति:

भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरणें साल भर लंबवत पड़ती है। इसके विपरीत भूमध्य रेखा से ध्रुव की ओर जाने पर पृथ्वी की गोलाई के कारण सूर्य से उतनी ही किरणें ज्यादा क्षेत्र पर पड़ती है।

अर्थात प्रति इकाई क्षेत्रफल पर सूर्य की ऊर्जा कम मात्रा में पहुंचती है जिस कारण तापमान कम रहता है। इस प्रकार सूर्य ताप का वितरण अक्षांशों द्वारा निर्धारित होता है इससे भूमध्य रेखा के आसपास अधिक तथा ध्रुव पर सबसे कम तापमान पाया जाता है।

कर्क रेखा भारत के लगभग मध्य से गुजरती है तथा भारत को दो भागों में विभाजित करती है इसे दक्षिण की ओर का क्षेत्र भूमध्य रेखा के अधिक निकट है।

जबकि उत्तर की ओर दूरी बढ़ती जाती है यही कारण है कि दक्षिण भारत में वर्ष भर उष्णता रहती है। जबकि उत्तर भारत में ग्रीष्म काल में अधिक गर्मी एवं शीत काल में कड़ाके की ठंड पड़ती है।

2.धरातल से ऊंचाई:

हम धरातल से जियो जियो उचाई पर जाते हैं तापमान घटता जाता है। वायुमंडल का तापमान मुख्य रूप से पार्थिव विकिरण से बढ़ता है। वायुमंडल का निचला भाग पार्थिव विकिरण से अधिक और ऊपरी भाग कम ताप प्राप्त करता है।

वायुमंडल की निचली परत में मौजूद जरवास पर धूल करण तथा विभिन्न प्रकार की गैस से पृथ्वी द्वारा उत्सर्जित ताप को अवशोषित कर लेती है। अतः धरातल के पास अधिक तापमान रहता है।

वायुमंडल की ऊपरी सतह में इसकी कमी से तापमान कम रहता है प्रति 165 मीटर ऊंचाई पर औसतन 1 डिग्री से ग्रे तापमान घटता जाता है।

दूसरा कारण यह भी है कि हम धरातल से जैसे-जैसे ऊंचे स्थानों पर जाते हैं हवा विरल होती जाती है सूर्य की सीधी किरणों की अपेक्षा विकिरण से धरातल के पास की हवा ज्यादा गर्म हो जाती है।

इसीलिए गर्मियों में पहाड़ों पर कम तापमान होने कारण लोग लेह, शिमला, मसूरी, मैनपाट आदि जगहों पर जाते हैं।

“विकिरण” किसी गर्म वस्त्रों से तरंगों के रूप में निकली हुई उस्मा को विकिरण कहते हैं दोपहर 12:00 बजे पृथ्वी को सूर्य से ज्यादा उस्मा मिलती है।

लेकिन लगभग 2:00 बजे ज्यादा गर्मी लगती है क्योंकि उस समय पृथ्वी की गर्म सतह से उस्मा तरंगे विकिरण के रूप में निकलने लगती है।

3.समुद्र से दूरी

समुद्र तटीय क्षेत्रों में साल भर लगभग एक समान तापन होता है जबकि समुद्र से दूर क्षेत्रों में विषम जलवायु पाई जाती है सम जलवायु का मतलब होता है

कि सर्दी और गर्मी के महीनों में औसत तापमान के अंतर का कम होना तथा विषम जलवायु का अर्थ है सर्दी गर्मी के महीनों में औसत तापमान का ज्यादा अंतर होना।

ऐसा क्यों होता है? पानी की विशेषताएं है कि वह देर से गर्म होता है तथा देर से ठंडा इसके विपरीत स्थल भाग जल्दी गर्म होते हैं।

तथा जल्दी ठंडे भी हो जाती हैं समुद्र तटीय क्षेत्रों में दिन में चलने वाली कम गर्म समुद्री हवाओं से तापमान सम बना रहता है।

परंतु समुद्र तट से दूर स्थित इस स्थान पर समुद्री हवाओं का प्रभाव नहीं पड़ता है। अतः वहां की जलवायु विषम होती है।

4.हिमालय पर्वत की स्थिति:

भारत के उत्तर उत्तर पश्चिम तथा उत्तर पूर्व में हिमालय एवं अन्य पर्वत श्रेणियों का विस्तार है इन ऊंची पर्वत श्रेणियों के कारण मत है।

इससे की ठंडी हवाएं भारत में प्रवेश नहीं कर पाती है यह दक्षिण पश्चिम से चलने वाली मानसूनी हवाओं को बाहर जाने से रूकती है तथा ध्रुवी ठंडी हवाओं को भी भारत में आने से रुकती है।

इस तरह से भारतीय उपमहाद्वीप में हिमालय की स्थिति जलवायु को एक नया रूप प्रदान करती है जिससे उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु के नाम से जाना जाता है।

5. वायुदाब

वायुदाब का संबंध तापमान के साथ होता है जब तापमान अधिक तो वायुदाब कम और जब तापमान कम तो वायुदाब अधिक होता है।

पवन हमेशा उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर चलती है। ऐसा क्यों? निम्न वायुदाब का अर्थ होता है वहां की हवाओं का विरल होना किसी भी स्थान की हवा गर्म होकर ऊपर उठती है।

जिससे वहां की हवा विरल होती है मान ले एक जगह पर एक घन मीटर में हवा के अणुओं की संख्या एक लाख है और दूसरी जगह पर एक घन मीटर हवा में अणुओं की संख्या 110000 है।

तो कहेंगे कि पहली जगह पर हवा का दबाव दूसरी जगह से कम है और दूसरी जगह से हवा पहली जगह की ओर बढ़ेंगे

6.मानव द्वारा निर्मित कारण

मनुष्य की आर्थिक क्रियाएं, औद्योगिकरण, नगरीकरण, भूमि उपयोग में परिवर्तन निर्वाणीकरण आदि भूमंडलीय ताप वृद्धि का कारण बन गए हैं इसका जलवायु परिवर्तन पर प्रभाव पड़ता है।

इस आर्टिकल का सारांश क्या है?

वह तो मैं आपको किस तरह से बरसात होती है उसके सभी कारण को एक-एक करके इस आर्टिकल में दर्शाया हूं ताकि आपको अच्छे से समझ आ सके।

दूसरे की आपको फिर भी कुछ बिंदु समझ नहीं आया होगा तो आप बेझिझक कमेंट बॉक्स पर कमेंट करके पूछ सकते हैं।

मैं उसका जवाब जितना संभव हो सके दूंगा मैं आपको इस आर्टिकल में मानसून के विभिन्न कारण को ध्यान बताया हूं।

और आपको इस मानसून के विभिन्न कारकों को ध्यान पूरा पढ़ने के लिए धन्यवाद इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जरूर शेयर करें।

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